सपनो का शहर शिमला: भाग 2

आपने अब तक पढ़ा कि कल हम कालीबाड़ी मंदिर, मॉल, और रिज गए और लौटते वक्त हमे शाम के 8 बज गए फिर हम खाना खा के सो गए। इस यात्रा-वृत्तान्त को आरम्भ से पढने के लिये यहाँ क्लिक करें।

लगभग सुबह 5 बजे उठा तो रजाई से बाहर निकलते ही काफी ठण्ड लगने लगी। लेकिन जल्दी से मुह हाथ धोया और सुबह लगभग 6 बजे ही निकल दिए फिर वही रेलवे स्टेशन तो हमारे रस्ते का मिडवे बन गया था रिज़ पर होते हुए हम पहुच गए जाखू मंदिर के रस्ते पर। मनमोहक द्रश्य से गुजरते हुए हम पहुंचे जाखू मंदिर। इतनी ऊँची मूर्ति मैंने अपने जीवन में पहली बार देखी आनंद आ गया

कहते है कि जब हनुमन जी संजीवनी बूटी लेने के लिए जा रहे थे, तब उन्होंने ऋषि राक्ष को तपस्या करते देखा। तो वह संजीवनी का पता जानने के लिए इस पर्वत पर उतरे और उन्हें (राक्ष+याक+याकू=जाखू) नाम पड़ा। आप कभी शिमला आयें तो यहाँ जरुर आयें।

रिज पर फहरता भारत की शान तिरंगा 


रिज से पहले मैं 

जाखू का रास्ता 

जाखू मंदिर मार्ग की सीढियों पर मैं 

मंदिर का प्रवेश द्वार पर मैं 




इतने मनमोहक द्रश्य के आप घंटो इन्हें निहारते रहेंगे 

कुछ इन्हें भी जरुर खिला जी हमने तो चने दिए थे 

जय बजरंग बलि 
जाखू के बाद मैं पैदल ही चल पड़ा और पहुँच गयेया इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज यह पहले राष्ट्र्पति निवास हुआ करता था मैं आपको इतिहास के बारे में तो नहीं बताऊंगा लेकिन है इतनी मस्त जगह जिसका कोई जवाब नहीं। इसमें सुन्दर गार्डन है और मियुजियम में कई एतिहासिक जानकारी मिलती है। अंदर फोटोग्राफी मना थी नहीं तो आपको अंदर की फोटो भी दिखाते। 




इसके बाद 103 के पॉइंट तक मैं पैदा आया और यहाँ से पुराने बस अड्डे की बस पकड़ी फिर वहां से विकास नगर जिसको न्यू शिमला भी कहा जाता है वहाँ गया। यहाँ मैं अपने भाई का स्कूल देखने आया था। मतलब जो काम मुझे पहले करना था वो मैं सबसे आखिरी में कर रहा हूँ। यह सरस्वती विद्या मंदिर, हिम रश्मि परिसर बहुत ही सुन्दर स्कूल है यहाँ प्रधानाचार्य जी से बात की तो अब यह फाइनल हो गया की छोटा भाई अब यहीं पढ़ेगा तो प्रिंसिपल साहब ने कहा के सेशन शुरू हो गया है भाई को जल्दी ले आओ





स्कूल देखने के बाद मैं कार्यालय आ गया तो 4 बज रहे थे फिर मैंने प्लान किया कि आज ही दिल्ली के लिए निकलना चाहिए तो लगभग 6 बजे तक नए बास अड्डे से कालका की बस पकड़ी और वहां से कालका मेंल से दिल्ली आ गया
बस इतनी सी थी ये कहानी।



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